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Tuesday, September 20, 2011

डर



अक्सर सताता रहता
एक डर
नौकरीपेशा आदमी को
कि हो भी पाएगा वो रिटायर
या उठा पाएगा पेंशन का लाभ कुछ दिन
या टें बोल जाएगा
समय से पूर्व...

नौकरीपेशा आदमी हमेशा
अपने गेटअप की चिंता किया करता
अपने कपडों को लेकर रहता परेशान
ठीक करता रहता अपना हुलिया
अलस्सुब्ह शेविंग करता
डाई करता इस तरह कि
एक भी बाल नहीं छूटता सफ़ेद

नौकरीपेशा आदमी हमेशा
डरता असमय मरने से
कोशिश करता बचने की
हर सम्भावित खतरों से

नौकरीपेशा आदमी हमेशा
रहता सावधान
इतना कि शेविंग से पूर्व
बदलता ब्लेड प्रतिदिन
स्कूटर स्टार्ट करने से पहले
पहनता आई एस आई टेस्टेड हेलमेट
सडक पर चलता लेफ्ट साईड
जेब में हमेशा रहता वैलीड लाईसेंस
ट्रेफ़िक पुलिस की वर्दी देख सहम जाता
जैसे बच्चा डरता अध्यापक से

नौकरीपेशा आदमी हमेशा
लिखता रहता खर्च का हिसाब
आना आना, पाई पाई
चिढ़ता चंदा मांगने वालों से
जीवन बीमा की किश्तें भरता समय से
ड्राविंग लाईसेंस कराता नवीन
करता शक पेट्रोल टंकी के मीटर पर
और पेट्रोल की क्वालिटी पर

नौकरीपेशा आदमी पहना हो चाहे
टीप टाप कपडा़
उसके अंदर रहता है डर
कहीं खुल न जाए भेद
कि फटी हैं उसकी ज़ुराबें
छेद है उसकी बनियान में

नौकरी पेशा आदमी
चिंतित रहता है कि
रिटायरमेंट से पूर्व
निपटा पाएगा बच्चों की शादी
मकान का निर्माण

इसी ऊहापोह में
बीत जाती है उसकी उम्र
और आधे अधूरे स्वप्न उसके
हो नहीं पाते पूरे....