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Tuesday, August 23, 2016

अनवर सुहैल : हम जो हमेशा से तुम्हारे लिए गैर-ज़रूरी हैं.....

अनवर सुहैल : हम जो हमेशा से तुम्हारे लिए गैर-ज़रूरी हैं.....: k Ravindra चोटें ज़रूरी नहीं किसी धारदार हथियार की हों किसी लाठी या गोली की हों किसी नामज़द या गुमनाम दुश्मन ने घात लगाया हो इससे कोई ...

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सबकुछ को बदलने की ज़िद में गैंती से खोदकर मनुष्यता की खदान से निकाली गई कविताएँ

------------------शहंशाह आलम  मैं बेहतर ढंग से रच सकता था प्रेम-प्रसंग तुम्हारे लिए ज़्यादा फ़ायदा था इसमें और ज़्यादा मज़ा भी लेकिन मैंने ...