सोमवार, 10 अगस्त 2026

ज़ोर-ज़ुल्म सहने का तरीका

 पिछले कुछ दिनों से कोई चिढ़

कोई नाराज़गी, कोई ग़म या गुस्सा
ले नहीं रहा आकार क्योंकि सामने
साकार खड़ा है प्रतिरोध, हर तरफ़ विरोध
एक जुट लाखों लोग एक साथ
भूल कर धर्म, लिंग, जाति, संप्रदाय
ये कैसी दवा पिला दी गई है इन्हें
कि ये बिना लड़े कंधे से कंधा मिलाकर
लाठियों, बंदूकों, हमलों से बेपरवाह
बढ़ते जा रहे आगे, इस बात को जानते हुए
कि सत्ता बड़ी क्रूरता से आंदोलनों को
खत्म करने के जानती है नुस्खे
कि इतने बरस सफलतापूर्वक
षडयंत्र करके पाई गई है सत्ता
अगर यह ज़ेन जी और ज़ेन अल्फा यूं ही
डटे रहे तो देख लेना इस पीढ़ी को
ज़ोर -ज़ुल्म सहने का सलीका आ गया है
और यह लड़ाई हंसते हंसते लड़ी जाएगी
बुढ़ापे में कविता से क्रांति की संभावनाओं को
हमने दे दी तिलांजलि और अपने दिलों की
अतृप्त इच्छाओं को जेन जी के जरिए हम भी लड़ेंगे।




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें