Total Pageviews

Tuesday, December 4, 2012

chalo achcha hua













चलो अच्छा हुआ


तुमने खुद कर लिया किनारा



तुमने खुद छुडा लिया दामन
तुमने खुद बचा लिया खुद को

..................................मुझसे

मेरी परछाई भी अब

नही पड़ेगी तुम पर

तुम निश्चिन्त रहो

कागज़ के उन पन्नों से क्यों डरते हो

वे तो मैं नष्ट कर दूँगा

उन तस्वीरों से क्यों डरते हो

उन्हें मैं जला दूँगा

हाँ, यादें मेरी अपनी जागीर हैं

यादें मेरे साथ दफ़न होंगी

Featured Post

सबकुछ को बदलने की ज़िद में गैंती से खोदकर मनुष्यता की खदान से निकाली गई कविताएँ

------------------शहंशाह आलम  मैं बेहतर ढंग से रच सकता था प्रेम-प्रसंग तुम्हारे लिए ज़्यादा फ़ायदा था इसमें और ज़्यादा मज़ा भी लेकिन मैंने ...