हम जिन्हें जानते हैं
क्या वाक़ई हम उन्हें जान पाते हैं
बस, इतना ही काफ़ी नहीं होता
हम उनसे मिलें हों या न मिले हों
भावनाओं की नदी क्या सही में नदी नहीं होती
दिल की गहराइयों से किया प्यार क्या
ज़माने को ज़ाहिर होना चाहिए या उस प्यार को
क्षितिज के काल्पनिक स्थल पर
कील से किसी तस्वीर की तरह टांग देना चाहिए
हम हर चाहने वाले के प्रति
दिल से आभारी होते हैं
शुक्रगुज़ार रहते हैं और कुछ न कुछ
चाहते हैं देते रहना बेज़रूरत भी
यह कोई कर्ज़ नहीं है जिसे चुकता करना होता है
इसे हम हैसियत से बढ़कर करना चाहते हैं अदा
क्या यह कोई ज़रूरी शर्त है इस रिश्ते की
या इस बेनाम से रिश्ते को
कोई नाम देना हमारी मजबूरी है
तुम नाहक चिंता करते हो
हम बिना कुछ जताए
बिना कुछ पाए
बहुत कुछ गंवाकर भी
इस रिश्ते को बचाकर रखेंगे
इस तरह कि कोई जान भी न पाए
रिश्ते को बुरी नज़र न लग पाए।।।।
गुरुवार, 15 जनवरी 2026
हम उन्हें जानते हैं
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