एक
शुक्रवार, 3 जनवरी 2025
सह अस्तित्व के पुरोधा
रविवार, 15 दिसंबर 2024
IIT खड़गपुर प्रस्तुत करता है ECHO: समग्र परिणामों के लिए संवाद में सुधार
IIT खड़गपुर, गोपाली यूथ वेलफेयर सोसाइटी (GYWS) के सहयोग से ECHO (समग्र परिणामों के लिए संवाद में सुधार) की घोषणा करता है, जो छात्रों के बीच सार्वजनिक बोलने और संवाद कौशल को बढ़ाने के लिए एक मुफ्त, तीन दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला है। यह कार्यशाला 21 से 23 दिसंबर 2024 तक आयोजित की जाएगी और इसका उद्देश्य 1500+ कॉलेज और हाई स्कूल छात्रों को सशक्त बनाना है, ताकि वे किसी भी स्थिति में प्रभावी और आत्मविश्वास के साथ संवाद कर सकें।
यह कार्यशाला एक ध्यानपूर्वक डिज़ाइन की गई पाठ्यक्रम पेश करती है, जिसमें विशेषज्ञ द्वारा निर्देशित सत्र, संवाद तकनीकों का व्यावहारिक अनुप्रयोग और इंटरएक्टिव अभ्यास शामिल हैं। प्रतिभागी प्रभावशाली संवाद के प्रमुख पहलुओं जैसे भाषण प्रस्तुतिकरण, स्वर की उतार-चढ़ाव, शारीरिक भाषा और प्रभावी भाषण लिखने की कला पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
कार्यक्रम में Toastmasters के एक अतिथि वक्ता की विशेष उपस्थिति होगी, जो प्रभावी भाषण लेखन और नेतृत्व संवाद पर अनमोल जानकारी प्रदान करेंगे। कार्यक्रम का समापन एक आश्चर्यजनक प्रतियोगिता के साथ होगा, जिसे Toastmasters के प्रतिष्ठित सदस्य जज करेंगे, जो छात्रों को अपने संवाद कौशल को प्रदर्शित करने का एक बेहतरीन अवसर प्रदान करेगा।
यह कार्यक्रम पूरी तरह से मुफ्त है और ऑनलाइन आयोजित किया जाएगा, जिससे देश भर के छात्रों के लिए यह सुलभ होगा। सभी प्रतिभागियों को सम्मान प्रमाणपत्र प्राप्त होंगे, और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जाएगा। प्रतियोगिता के विजेताओं को Amazon वाउचर्स भी दिए जाएंगे।
GYWS, IIT खड़गपुर का सामाजिक सेवा विभाग, ECHO के माध्यम से संस्थान की समग्र विकास और सामाजिक प्रगति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस अद्वितीय अवसर को न चूकें और अपने संवाद कौशल को सुधारें तथा आत्मविश्वास बढ़ाएं। आज ही पंजीकरण करें और अपने घर के आराम से इस समृद्ध यात्रा की शुरुआत करें!
Links :
https://forms.gle/EDGEnEhqTcatrWYRA
https://unstop.com/o/Aq0ZeJ6?utm_medium=Share&utm_source=shortUrl
शुक्रवार, 6 दिसंबर 2024
"आईआईटी खड़गपुर: युवा इनोवेटर्स के लिए YIP का छठा संस्करण शुरू"
आईआईटी खड़गपुर यंग इनोवेटर प्रोग्राम के पहले दौर के लिए आवेदन स्वीकार कर रहा है। पंजीकरण की अंतिम तिथि 12 दिसंबर, 2024 है। यह कार्यक्रम का छठा संस्करण है, जिसका उद्देश्य युवा दिमाग में वैज्ञानिक सोच विकसित करना है।
प्रतियोगिता में वर्तमान में कक्षा 8 से 12 में नामांकित छात्रों का स्वागत है। ऑनलाइन मोड में आयोजित होने वाले पहले दौर के बाद देश भर की शीर्ष टीमों का चयन किया जाएगा और उन्हें अपने मॉडल या प्रोटोटाइप और चार्ट प्रदर्शित करने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, खड़गपुर बुलाया जाएगा, जिसका मूल्यांकन संस्थान के प्रोफेसरों द्वारा किया जाएगा।
YIP ने भारत के पूर्व राष्ट्रपति श्री रामनाथ कोविंद सहित दुनिया भर के दिग्गजों से प्रशंसा प्राप्त की है, जिन्होंने वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने और युवाओं को गंभीरता से सोचने के लिए सशक्त बनाने की पहल की सराहना की। सिंगापुर के GIIS स्मार्ट कैंपस की राधा जी ने कहा, “यह एक शानदार पहल है जो युवाओं में 21वीं सदी के कौशल को विकसित करने में मदद करती है।” 2023 में 3,000 से अधिक प्रविष्टियों के साथ, YIP वैश्विक स्तर पर युवा दिमागों को प्रेरित करना जारी रखता है।
भागीदारी के लिए, स्कूल के प्रिंसिपल को इस कार्यक्रम के लिए एक समन्वयक शिक्षक को नामित करना होगा। शिक्षक को छात्रों के पंजीकरण के लिए एक यूजर आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा। छात्रों को दो से तीन सदस्यों की एक टीम बनाकर स्कूल के समन्वयक शिक्षक को अपना नाम और विवरण प्रस्तुत करना होगा।
पहले दौर की प्रस्तुति टीम द्वारा चुने गए विषय पर आधारित वैज्ञानिक प्रस्ताव को प्रस्तुत करने के साथ शुरू होती है। पहले दौर के परिणाम वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। अगले दौर में पहुंचने वाले सभी प्रतिभागियों को ईमेल के माध्यम से भी खबर मिलेगी।
सेमीफाइनल के लिए, देश भर की शीर्ष टीमों का चयन किया जाएगा। चयनित टीम को आईआईटी खड़गपुर में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम के लिए अपनी उपस्थिति की पुष्टि करनी होगी। पहले दौर के परिणामों की घोषणा के बाद इस दौर के लिए पंजीकरण शुल्क घोषित किया जाएगा।
दूसरे दौर की क्वालीफाइंग टीमें विजेता दौर में प्रवेश करेंगी। इस दौर में प्रत्येक टीम को एक प्रस्तुति के रूप में अपने विचारों को प्रदर्शित करने का अवसर दिया जाएगा, जिसके बाद एक प्रश्न और उत्तर सत्र होगा।
यदि छात्र अपने प्रोजेक्ट पर और अधिक काम करने में रुचि रखते हैं, तो हम उन्हें आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसरों से जोड़ सकते हैं जो निर्णायक मंडल में हैं। पिछली बार मुख्य अतिथि ने अंतिम दौर में प्रस्तुत सभी छात्रों से व्यक्तिगत रूप से बात की थी।
पंजीकरण प्रक्रिया के लिए लिंक यहाँ है: https://yip.iitkgp.ac.in/
गुरुवार, 10 अगस्त 2023
IBNE MARIYAM TUM AAYE NHIN
अनवर सुहैल की कवितायेँ :
एक
इब्ने-मरियम तुम आये
नहीं...
देखो
तो सही इब्ने-मरियम
जाने
कितने लोग अपने कमज़ोर कांधों पर
उठाये
फिर रहे हैं वज़नदार सलीब
छिल
चुकी काँधे की चमड़ी
छलक
आये खून के कतरे
झाँकने लगीं हड्डियाँ
ये लोग हार नहीं मानते
और जिद्दी इतने कि जीये जाते हैं
ढीठ ऐसे कि पीये जाते आंसू
देखो
तो सही इब्ने-मरियम
काँधे
पर सलीब उठाये
छायाओं
की तरह डोलती इन आबादियों को
ये
थके हैं लेकिन हारे नहीं हैं
ये
कराहते हैं लेकिन गिडगिडाते नहीं हैं
ये
सुबकते हैं लेकिन इनकी आँखों में
तैरता
है क्षमा का समंदर
इन्हें
यकीन है पुख्ता इतना
कि
तुम आओगे ज़रूर एक दिन
और
हर एक काँधे से हटेगा सलीब का बोझ
ये
जोह रहे हैं बाट तब से
जब
तुमने कहा था कि तुम आओगे
ये
खड़े हैं इसी तरह गुज़र गई सदियाँ कई
तुम
आये नहीं इब्ने मरियम
और
जाने कितने धोखेबाज़
बन-बन
कर नकली मसीहा जख्मों को हरियाते रहे
और
जाने कितने विध्वंसक
दिखाते
रहे स्वप्न और अधरात जचक कर टूटती रही नींदें
तुम्हें
मालूम हो इब्ने मरियम
कमजोर
कांधों पर सलीब उठाये लोगों की
बढती
जा रही तादाद
इन्हें
रेवड़ की तरह हंकालने वाले
जो
ज्यादा नहीं हैं
जिन्हें
चाबुक बनाता है शक्तिशाली
और
कोई किताब है जिससे मिलती है वैधता
इन
किताबों में जब चाहें वे कर लेते मन-माफिक संशोधन
जाने
कितने विद्वान इनके चाकर हैं
जिनके
हाथों में कलम की जगह तलवारें हैं
जिनके
दिमाग में इल्म की जगह बारूद है
ये
लोग चीत्कार को चुप कराने के खोले बैठे हैं विश्व-विद्यालय
देखो
तो सही इब्ने मरियम
कितने
यकीन से डोल रही हैं छायाएं
सलीबें
उठाये तब से
तुम्हारे
आगमन की राह तकते....
दो
प्रतिरोध
जब भी होता वो दूसरों के बीच
मिलाता हर किसी की हाँ में हाँ
कभी बोलता नहीं बहुमत के विरुद्ध
इसका ये मतलब न निकालें
उसकी अपनी कोई होती नहीं राय
मैंने देखा है उसे अपने जैसे लोगों के बीच भी
तब वो नहीं रहता
तुम्हारे इशारों से नाचने वाला रोबोट
उसके शब्दकोश में भी हैं प्रतिरोध के शब्द
उसके सुरों में भी है विरोध के गान
तुम क्या जानों की वह मुझे
मानता है कितना अपना
कि एकबारगी उबल पड़ता है
उसके सीने में सुप्त ज्वालामुखी
इस बीच कोई दूजा उसे देख ले
तो यही घोषणा करता है
कि पी ली है उसने दारू
या लग गया गांजा का नशा
दिमाग फिर गया है
होश में आएगा तो ठीक हो जायेगा ससुरा
जान लो वो होश में ही है
तुम लोगों के बीच अपने क्रोध को
छुपाने के लिए करता रहता ढोंग
कि जैसे उसने किया हो नशा...
उसकी ताकत यही चालाकी तो है
इसी कारण वो बचा हुआ है
और इसी तरह अभिनय करते-करते
किसी दिन बोलेगा वो तो
भागने के लिए तुम्हें छोटी पड़ेगी
इतनी बड़ी धरती!
तीन
अंतिम व्यक्ति
हर कोई करता बात
पंक्ति के अंतिम व्यक्ति की
और वह व्यक्ति कौन है
उसकी शिनाख्त क्या है
इन सबसे बेपरवाह
गोलघरों में गहन मंत्रणा होती है
अंतिम व्यक्ति नहीं पाता अपने पीछे
कोई और व्यक्ति
कि अंतिम व्यक्ति की पीड़ा
पंक्ति में लगा अंतिम व्यक्ति ही समझ सकता है
उसके आगे तो होते हैं करोड़ों-करोड़ लोग
लेकिन उसकी पीठ पर सर्द हवा के थपेड़े
अहसास कराते रहते हैं
कि वो है अभिशप्त अंतिम व्यक्ति
जिसकी बेहतरी के लिए बनती रहती हैं योजनायें...
पंक्ति के उस अंतिम व्यक्ति की
व्यथा को अभिव्यक्त करो तो
लगने लगती तोहमत-दुत्कार
लामबंद हो जाते आलोचक
कतई नहीं है ये भोगा हुआ यथार्थ
फैशन के तहत कहा जा रहा है ये सब
ब्रांडिंग की जा रही अंतिम व्यक्ति के दुखों की
बेचे जा रहे उसके स्वप्न किसी उत्पाद की तरह
पंक्ति में खड़ा अंतिम व्यक्ति कभी नहीं जान पाता
कि उसके पक्ष में तैनात हैं सैकड़ों फोरम
हजारों प्रवक्ता, लाखों एक्सपर्ट पा रहे हैं मोटा वेतन
सत्ता तक पहुँचने की सीढ़ी में है
उस अंतिम व्यक्ति की हड्डियों के पायदान
और उधड़ी त्वचा की कालीन...
पंक्ति में खड़ा अंतिम व्यक्ति
इन सबसे अनजान
जोहता रहता बाट
उस एक व्यक्ति की
जो अचानक किसी दिन
उसकी पीठ से आ सटेगा
और इस तरह मिल जायेगी उसे
अंतिम व्यक्ति के अभिशाप से मुक्ति...
चार
निष्पक्ष सयाने
चिडचिडाकर
निष्पक्ष सयाने
खोजते
हैं तर्क और साक्ष्य
समझाना
चाहते हैं कि कुछ भी टूटे न फूटे
बचा
रहे सब कुछ इस तरह
कि
जोड़ना कठिन होता है
कैसे
समझाया जाए उन्हें
कि
ये समय निष्पक्ष सयानों का नहीं है
दबंगई
हावी है
बड़ी
निर्लज्जता से लतिया दी जाती हैं दलीलें
गालियाँ
ही सबसे बड़ा तर्क हैं
और
अकारण मार दिए जाने का भय
खामोश
कर देता है
गुनी
सयानों को...
इतना
निरादर सहकर भी
रोज़
कोई न कोई निष्पक्ष सयाना
अपनी
बात रखता है फिर भी
कि
तड़ातड़ बरसने लगती हैं गालियाँ
उलटी-सीधी
बोलियाँ
लानतें-मलामतें
और
दूर-दूर तक नहीं दीखता
कोई
हमनफ़स-हमनवां
यह
समय सच बोलने वालों को
अकेला
कर दिए जाने का समय है
और
ये समय ठहर सा गया है
रुक
सा गया है
टूटती
जाती है उम्मीद
कैसे
खुद को सांत्वना दें
कोई
सूरत नज़र नहीं आती......
शनिवार, 24 सितंबर 2022
प्रेम-कविता
उसने मुझसे कहा
ये क्या लिखते रहते होग़रीबी के बारे में
अभावों, असुविधाओं,
तन और मन पर लगे घावों के बारे में
रईसों, सुविधा-भोगियों के ख़िलाफ़
उगलते रहते हो ज़हर
निश-दिन, चारों पहर
तुम्हे अपने आस-पास
क्या सिर्फ़ दिखलाई देता है
अन्याय, अत्याचार
आतंक, भ्रष्टाचार!!
और कभी विषय बदलते भी हो
तो अपनी भूमिगत कोयला खदान के दर्द का
उड़ेल देते हो
कविताओं में
कहानियों में
क्या तुम मेरे लिए
सिर्फ़ मेरे लिए
नहीं लिख सकते प्रेम-कविताएँ…
मैं तुम्हे कैसे बताऊँ प्रिये
कि बेशक मैं लिख सकता हूँ
कविताएँ सावन की फुहारों की
रिमझिम बौछारों की
उत्सव-त्योहारों की कविताएँ
कोमल, सांगीतिक छंद-बद्ध कविताएँ
लेकिन तुम मेरी कविताओं को
गौर से देखो तो सही
उसमे तुम कितनी ख़ूबसूरती से छिपी हुई हो
जिन पंक्तियों में
विपरीत परिस्थितियों में भी
जीने की चाह लिए खडा़ दिखता हूँ
उसमें तुम्ही तो मेरी प्रेरणा हो…

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