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Saturday, June 8, 2013

खानदानी भाट-चारण

के रवीन्द्र की पेंटिंग



















उसके जाते ही

बदल गए उसके लोग

करते थे जो निश-दिन

उसका कीर्ति-गान

उनका था ऐसा आचरण

जैसे वे हों खानदानी भाट-चारण

जबकि उसने

जो भी कदम उठाये

गलत ही उठाये

लेकिन उसके मुरीद

साधे रहे  चुप्पी

कहीं नहीं था कोई विरोध

उसके डर से

तथा-कथित योद्धाओं के तलवार

जंग खाते रहे म्यानों में

आम-जन को बहलाए रखे

उलटे-सीधे बयानों में..

आज वही लोग

उसके जाने के बाद

खोले बैठे निंदा-पुराण

गरियाते उसको सरे-आम!

जानती है जनता सब-कुछ

ऐसे लोगों को पहचानती बहुत-कुछ

और याद रखती है

शोषण में सहायक

ऐसे विभीषणों को....

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