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Wednesday, May 17, 2017

भीड़ को हल्के से मत लेना

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भीड़ इकट्ठी की जाती है
भीड़ कभी खुद भी लग जाती है
अब जमाना बदल गया है
भीड़ को हल्के से मत लेना
धोखे में मत रहो कि 
भीड़ का कोई चेहरा नहीं होता
भीड़ का धरम होता है
भीड़ की जात होती है
भीड़ की अपनी पहचान होती है
इस भीड़ को कम कर आंकना
भीड़-तंत्र को स्थापित होने में मददगार होना है
किसी भी दौर में
बहुत मुश्किल है दोस्तों
भीड़ इकट्ठी करना
भीड़ पर हंसना खुद के पैरों पर
कुल्हाड़ी मारने जैसा है
ये भीड़ है न जो टकटकी लगाये
किसी चमत्कार की आस में इकट्ठी है
उसकी इस आस को अपने पक्ष में
देखो तो मदारी कैसे कर ले रहे हैं
तुम अपनी कंदराओं में
कर रहे हो शोध उस भीड़ के मनोविज्ञान पर
भीड़ का लोकशिक्षण होता है
भीड़ का अपना एक अनुशासन होता है
और यही भीड़ एक दिन तुम्हारे काम आ सकती है
इस भीड़ को हल्के मत लो
कोशिशें करो कि तुम भी
इकट्ठी कर सको भीड़
अपने रंग में रंग सको जिन्हें
लेकिन भीड़ की भाषा भी तुम्हें आनी चाहिए.....
तुमने हमेशा भीड़ का उड़ाया है मज़ाक
कह दिया कि भीड़ का नहीं होता कोई
चेहरा, चरित्र और संस्कार
सुनो मैंने बड़े गौर से
देखा है एक एक चेहरा
और ये भी देखा है कि ये भीड़
कभी साथ थी तुम्हारे भी
कि ये तुम्हारे लोग हैं
ये तुम्हारे ही लोग हैं भाई।।।