गुरुवार, 1 सितंबर 2011
अल्पसंख्यक या छोटा भाई
सब बोलें पर वो न बोले
सब चीखें पर वो न चीखे
सब कोसें पर वो न कोसे
क्योंकि वो मालिक नहीं है
क्योंकि वो ज्येष्ठ नहीं है
इसीलिए वो श्रेष्ठ नहीं है...
शनिवार, 27 अगस्त 2011
kuchh log
कुछ लोगों ने घोषणा की
हम मालिक हैं
क़ानून हम बनाएंगे
कुछ लोगों ने घोषणा की
हम जनता हैं
...हम हर क़ानून का पालन करने के लिए अभिशप्त हैं
कुछ और लोगों ने ऐलान किया
हम आन्दोलनकारी हैं
कानून हमारे मन-माफिक बनना चाहिए
मालिकों और आंदोलनकारियो में छिड़ी जंग
फलता-फूलता रहा मिडिया
और पिसती रही जनता ...
हम मालिक हैं
क़ानून हम बनाएंगे
कुछ लोगों ने घोषणा की
हम जनता हैं
...हम हर क़ानून का पालन करने के लिए अभिशप्त हैं
कुछ और लोगों ने ऐलान किया
हम आन्दोलनकारी हैं
कानून हमारे मन-माफिक बनना चाहिए
मालिकों और आंदोलनकारियो में छिड़ी जंग
फलता-फूलता रहा मिडिया
और पिसती रही जनता ...
गुरुवार, 18 अगस्त 2011
शनिवार, 6 अगस्त 2011
majburi
मंगलवार, 2 अगस्त 2011
sanket-8
संकेत का अंक ८ प्रकाशित हुआ है. इसमें वरिस्थ कवि ओम शंकर खरे 'असर' की ग़ज़लें और कवितायेँ हैं . अंक पाने के लिए अपना पता एस एम् एस करें : ९९०७९७८१०८ पर ...
गुरुवार, 23 जून 2011
पढ़ रहा हूँ अखिलेश की किताब 'मकबूल'
जैसे देख रहा हूँ हुसैन के घोड़े
जैसे देख रहा हूँ हुसैन की सफ़ेद दाढ़ी
जैसे देख रहा हूँ हुसैन की लम्बी उन्गलिओं में सजा ब्रश
जैसे देख रहा हूँ क़तर में जलावतन हुसैन
...जैसे देख रहा देवी देवताओं के बीच हुसैन
जैसे देख रहा हूँ त्रिशूल से फाड़ी जाती
और मशाल में जलती पेंटिंग्स....
गुरुवार, 9 जून 2011
धरना प्रदर्शन
राज-मैदान मेँसमझे श्रीमान !
राजा की मर्ज़ी बिना
व्यवस्था के ख़िलाफ़
झुनझुने बजने लगे
आ जुटे तमाशबीन
झुनझुनोँ का शोर
भाया नहीँ
राजा के चमचोँ को
आनन-फानन
राजा की फौज आ गई
झुनझुने तोड़े जाने लगे
बजाने वाले भागे
बजवाने वाले भागे
तमाशबीनोँ घायल हुए
तमाशबीनोँ को
ताली बजाने के सिवा
आता न था कुछ
तमाशबीन आदतन
पाला बदल
करने लगे
राजा का गुणगान...
बुधवार, 1 जून 2011
मंगलवार, 24 मई 2011
कविता छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के कविओं की कविताओं पर केन्द्रित " कविता छत्तीसगढ़" एक ऐसा प्रयास है, जिसमे छत्तीसगढ़ के जन-जीवन, लोक-रंग, मिटटी की खुशबु, और नव चेतना के दर्शन अनायास मिल जाते हैं...
श्री सतीश जयसवाल जी हिंदी के वरिष्ठ कथाकार, कवि, यायावर और संस्मरण लेखक के रूप में प्रसिद्द हैं, उनकी कोशिशों का नतीजा है "कविता छत्तीसगढ़"
पुस्तक के सफल सम्पादन का श्रेय सतीश जायसवाल को जाता है, पुस्तक की भूमिका लिखी है श्री विश्वरंजन ने .
छत्तीसगढ़ के १०३ कविओं की कविताओं को समेटे ४४० पृष्ठ की किताब के
प्रकाशक हैं :
श्री सतीश जयसवाल जी हिंदी के वरिष्ठ कथाकार, कवि, यायावर और संस्मरण लेखक के रूप में प्रसिद्द हैं, उनकी कोशिशों का नतीजा है "कविता छत्तीसगढ़"
पुस्तक के सफल सम्पादन का श्रेय सतीश जायसवाल को जाता है, पुस्तक की भूमिका लिखी है श्री विश्वरंजन ने .
छत्तीसगढ़ के १०३ कविओं की कविताओं को समेटे ४४० पृष्ठ की किताब के
प्रकाशक हैं :
वैभव प्रकाशन , अमीनपारा चौक , पुरानी बस्ती , रायपुर छ ग
मूल्य ५०० शुक्रवार, 20 मई 2011
रविवार, 15 मई 2011
हंस मई २०१० में प्रकाशित कहानी "नीला हाथी"
![]() |
| हंस मई २०१० कहानी : अनवर सुहैल |
हंस मई २०१० में मेरी कहानी "नीला हाथी" प्रकाशित हुई है...
अंधविश्वाश में खिलाफ जिहाद करती कहानी से कुछ उद्धहरण प्रस्तुत हैं :
"ये मज़ार न होते तो क़व्वालिये बेकार हो गए होते, तो श्रद्धालु इतनी गैरजरूरी यात्राएं न करते और बस - रेल में भीड़ न होती. ये मज़ार न होते तो लड़का पैदा करने की इच्छाएं दम तोड़ जाती. मज़ार न होतो तो जादू-टोने जैसे छुपे दुश्मनों से आदमी कैसे लड़ता? ये मजार न होते तो खिदमतगारों, भिखारिओं, चोरों और बटमारों को अड्डा न मिलता?"
"मैंने कई मजारों की सैर की . सभी जगह मैंने पाया की वहाँ इस्लाम की रौशनी नदारत थी. था सिर्फ और सिर्फ अकीदतमंदों की भावनाओं से खेलकर पैसा कमाना . मैं तो सिर्फ मूर्तियाँ बनाया करता था, लेकिन इन जगहों पर मैंने देखा की एक तरह से मूर्तिपूजा ही तो हो रही है. तभी मेरे दिमाग में ये विचार आया की मैं भी पाखण्ड करके देखता हूँ."
आप भी 'नीला हाथी " कहानी पढ़ें और अपने विचारों से अवगत कराएं ....
शनिवार, 23 अप्रैल 2011
ग़ज़ल २
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| नजमा सालेह विशाखापत्तनम की पेंटिंग |
शहर में आज फिर क्या हो गया है
हवा में कौन नफरत बो गया है
तिरी खुशबु समेटे बाजुओं में
मिऱा कमरा अकेला सो गया है
हज़ारों शख्स भागे जा रहा हैं
नहीं कुछ जानते क्या हो गया है
न जाने कौन सी बस्ती उधर है
न आना चाहता है, जो गया है
वो आया था घटा का भेस धरकर
गया तो आसमा भी धो गया है
---अनवर सुहैल
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